Wednesday, March 2, 2011

कभी यूँ भी तो हो, मेरे दिल की दुआ तेरी आँखों में महफूज़ मिले...


कभी यूँ भी तो हो, मेरे दिल की दुआ तेरी आँखों में महफूज़ मिले...
चल न सके एक साथ मीलों तक तो क्या हुआ,मेरे साथ आज तू दो कदम तो चले...

सदियाँ गुजरी हैं मेरी यूँ ही तन्हाई में, मुझे महफ़िल का दीदार तू अब करा तो सही...
कुछ भी तो नहीं मिला मुझे तेरी मोहब्बत में, तू मेरा है एक बार ये एहसास करा तो सही...
फिरसे देख आदत हुई है मुझे तेरे आने की...
अब नहीं है तेरा ये रास्ता मुझे यकीन दिला तो सही...

दिल से अब ये भी सिलसिला जाता रहा...
आदत हो गयी है तेरे बिना रहने की अब तेरा साथ मुझे यूँ रूमानी नहीं लगता...

किसी की दुआओं क लिए टूट गया देखो,
कैसे कहूँ मुझे वो तारा बहुत प्यारा था...

ऐसा क्या था जो रातों को भी जागती थी वो...
आँखों में महफूज़ रखना मैंने माँ से सीखा है...

कुछ सिलसिला ख्वैशों का ही है शायद..
वरना अब उनसे मिलने की उम्मीद कहाँ है...

Lots of Love! Anji

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