मुझे आज भी नहीं पता वो कौन सी बात है जो मुझे उस में सब्सी अची लगती थी... उसके सपने, जो की अक्सर अधूरे थे पर वो उनमे यकीन रखता था और मुझे उस यकीन से मोहब्बत थी, क्यूंकि मुझे लगता था की शायद मैं कभी उन सपनो को अपने भगवान् से ज़रूर अपनी किसी चीज़ के बदले मांग कर उसे तोहफे में दे दूंगी और मैं ये जानती थी की उसकी हसीं से ज्यादा बड़ा तोहफा मेरे लिए नहीं हो सकता!
या फिर मुझे मोहब्बत थी उसकी उस अदा से जब वो हमेशा मुझे उसका होने का यकीन दिलाता था और मैं जानती थी की उस घेरे से मैं कभी बहार जा ही नहीं सकती थी, कम से कम मेरे लिए ये नामुमकिन था... उसकी दोस्ती?
पर दोस्त तो मेरे आज भी हैं और शायद उस से कहीं ज्यादा मेरा ख्याल रखने वाले क्यूंकि अक्सर तो उसका ख्याल मैं रखती थी...पर उसका ख्याल रखना मुझे बहुत अछा लगता था, अछा उसकी हसीं से कम पर मेरी हसी से ज्यादा.
ये भी हो सकता है की मुझे उसकी आँखें पसंद थी, वो आँखें जिनको मन कर पाना मेरे बस के बाहार था...वो आंखे जो हमेशा वो बोलती थी जो उसके दिल में होता था..वो भी बोलता था पर उसे कभी उसके दिल की बात पता नहीं होती, और उसकी ऑंखें सब कुछ जानती हैं.
वैसे उसकी कमजोरियां भी हो सकती हैं... मुझे वो भी पसंद थीं.. उसका अक्सर कल में उलझे रहना, कुछ ऐसे ख्वाब देखना जो पूरी करने की उसने कभी कोशिश नहीं की, सबको खुश रखना, खुद अन्दर से सख्त होने का दिखावा करना, उसकी जिद, बेमानी बातें, हर दिन एक नया पागलपन...सभी कुछ तो.. सभी से प्यार था और अपनी इस आदत से भी की उसकी हर बात मैं बहुत गंभीरता से लेती थी... चाहे वो कोई नया बचपना ही क्यूँ न हो..!
बचपना भी हो सकता है, उम्र कुछ ज्यादा तो थी नहीं.. मेरी उम्र का ही तो था.. और मुझसे ज्यादा बचपना किस्मे है?
वैसे किसी ने कहा था बचों को बचे बहुत भाते हैं, उनमे इर्षा नहीं होती और ना हर चीज़ को तोल कर करने की आदत.. वो तो बस हर काम दिल से करते हैं, खुसी से.. और दिल से ज्यादा तो जज्बातों का ख्याल कोई रख ही नहीं सकता.
दिल तो बड़े तोड़ देतें हैं,अपनी जिद से या अपनी बंदिशों से या फिर अपनी कुर्बानियों से... हम भी तो बड़े होकर यही करते हैं... छोटे थे तो कहाँ किसी की परवाह करते थे, जो चीज़ अची लगी उसके साथ अपने पूरा दिल लगा लेते थे, बिना कुछ सोचे समझे :)
फिर भी सोचूं तो आज तक मतलब समझ नहीं आया मुझे...
अधुरा है मगर फिर भी पूरा क्यूँ है,
तेरा ये रिश्ता मुझसे टूटता क्यूँ नहीं..
कौन सी बात है जो आज तक दिल घेरे हुए है,
तेरा बनाया वो दायरा मुझसे छूट ता क्यूँ नहीं..
किस साज़ पर नाचती है ज़िन्दगी अब तक,
सुरों की फिर नयी कोई साज़िश तो नहीं..
कब कहा मोहब्बत नहीं है तुझसे,
सिर्फ चुप हूँ इसका मतलब नहीं तो नहीं..
Lots of Love! Anji

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